ओडिशा में तंबाकू-निकोटीन पर सख्त प्रहार: पूरे राज्य में सभी उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू

Sat 24-Jan-2026,09:06 PM IST +05:30

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ओडिशा में तंबाकू-निकोटीन पर सख्त प्रहार: पूरे राज्य में सभी उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू Odisha Tambaku Ban
  • ओडिशा में तंबाकू-निकोटीन के सभी उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध.

  • उल्लंघन पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द और जेल तक का प्रावधान.

  • युवाओं और बच्चों को नशे से बचाने पर विशेष जोर.

Odisha / Bhubaneshwar :

Odisha / ओडिशा सरकार ने जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए पूरे राज्य में तंबाकू और निकोटीन युक्त सभी उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। सरकार के इस कदम को राज्य में बढ़ते कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा और साहसिक निर्णय माना जा रहा है। नए नियमों के तहत गुटखा, पान मसाला, जर्दा, खैनी, तंबाकू मिश्रित सुपारी सहित किसी भी रूप में मौजूद तंबाकू या निकोटीन वाले उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, व्यापार और बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी। यह प्रतिबंध पैक्ड या अनपैक्ड, चबाने या पीने योग्य, किसी भी ब्रांड नाम या स्थानीय पहचान से बिकने वाले सभी उत्पादों पर समान रूप से लागू होगा।

राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या कारोबारी इस प्रतिबंध का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने और जरूरत पड़ने पर जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया है। प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे संयुक्त रूप से छापेमारी अभियान चलाकर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करें। खास तौर पर स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों के आसपास निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों और युवाओं को तंबाकू की लत से दूर रखा जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और निकोटीन का सेवन मुंह, गले, फेफड़े और पेट के कैंसर का प्रमुख कारण है। इसके अलावा यह हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और श्वसन संबंधी बीमारियों का जोखिम भी कई गुना बढ़ा देता है। विशेषज्ञों के अनुसार ओडिशा में पिछले कुछ वर्षों में ओरल कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जिसमें बड़ी संख्या युवाओं की है। सस्ते और आसानी से उपलब्ध गुटखा व पान मसाला ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में राज्य सरकार का यह निर्णय भविष्य की पीढ़ियों को गंभीर बीमारियों से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उद्देश्य किसी के रोजगार को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। इसके लिए वैकल्पिक रोजगार और नशा मुक्ति कार्यक्रमों पर भी काम किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तंबाकू छोड़ने के लिए काउंसलिंग, हेल्पलाइन और जागरूकता अभियान तेज किए जाएंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनजागरूकता कार्यक्रम चलाकर लोगों को तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी जाएगी।

सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यदि इसे ईमानदारी और सख्ती से लागू किया गया, तो ओडिशा देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है। हालांकि, कुछ व्यापारिक संगठनों ने शुरुआत में चिंता जताई है, लेकिन सरकार का कहना है कि जनस्वास्थ्य के सामने कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, ओडिशा सरकार का यह कदम राज्य को तंबाकू मुक्त बनाने और एक स्वस्थ समाज की दिशा में मजबूत पहल के रूप में देखा जा रहा है।